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Fundamental Analysis क्या है और कैसे सिखे?

Fundamental Analysis कैसे सिखे?

Fundamental analysis

आज हम जानेंगे कि Fundamental Analysis क्या है ? और कैसे काम करता है ? तो चलिए शुरू करते हैं।

• Fundamental analysis

आसान भाषा में बताऊं तो Fundamental Analysis का मतलब होता है किसी बिजनेस को समझना और उसे परखना,देखिए इन्वेस्टमेंट और बिजनेस दोनों एक दूसरे से पूरी तरह जुड़े हैं, इन्वेस्टिंग करते वक्त आपको इन्वेस्टिंग के तरीके  के साथ-साथ बिजनेस के तरीके से भी सोचना पड़ता है और ऐसे ही बिजनेस के तरीके के साथ-साथ आपको इन्वेस्टिंग के तरीके से भी सोचना होता है तो fundamental analysis करते वक्त आपको दोनों तरीके से सोचना होता हैं।

• Fundamental Analysis सीखने के लिए -

• आपको Financial statement और Financial ratio का Analysis और valuation करना शिखना परेगा।

• आपको competitive advantage,business strategy और management analysis भी आना चाहिए।

• Fundamental analysis दो तरह के होते हैं -

1.Qualitative Analysis

2.Quantitative Analysis

• Qualitative Analysis में Management,business strategy,competitive advantage यह सारी चीजें आती है जिसे आप नाप नहीं सकते।

• Quantitative Analysis में Financial Statement और Financial Ratio आता है।

• ज्यादातर हम देखते हैं कि quantitative analysis से लोग अपना analysis शुरू करते हैं पहले लोगों का ज्यादा ध्यान financial statement और financial ratios पर  रहता था आप पहले की किताब पढ़ोगे तो देखोगे कि ज्यादा ध्यान financial statement पर किया गया हैं।

• पहले कहते थे कि अगर किसी कंपनी के financial statement मजबूत है उसके growth prospectus अच्छे हैं और वह कंपनी अच्छे valuation पर मिल रही है तो उसे अच्छी इन्वेस्टमेंट माना जाता था पर अब ऐसा नहीं है अब कंपनी का मैनेजमेंट ऑनेस्ट होना बहुत जरूरी है इसलिए पहले आप management analysis करो फिर बाकी सब करो।

•अब हम कुछ basic चीजें सीखेंगे जिनके आधार पर fundamental analysis किया जाता हैं-

EPS (Earning Per Share)

• Earning per share का मतलब है कि अपने खरीदे हुए एक शेयर पर कंपनी कितना प्रॉफिट कमा रही हैं।

• EPS निकालने का फार्मूला है EPS Equal to profit divided by no.of shares.

P/E (Price to earning ratio)

• कभी-कभी आपको लगता है कि यह शेयर overprice तो नहीं मतलब शेयर की प्राइस जितनी होनी चाहिए उससे ज्यादा तो नहीं?  ऐसे समय में आप नहीं P/E करके पता कर सकते हैं कि सच में शेयर ओवर प्राइज है या नहीं।

• P/E में बताता है कि कंपनी के प्रॉफिट के आधार पर आपको कंपनी के शेयर किस भाव में खरीदने चाहिए।

• price to earning ratio का फार्मूला है P/E equal to price of one share divided by EPS.

• अगर किसी कंपनी का P/E 13 से 20 के बीच में है तो उसे fair value माना जाता है यानी अच्छा माना जाता है और अगर इससे ज्यादा है तो उसके दो कारन होते हैं या तो कंपनी का शेयर ओवर प्राइस है या तो कंपनी की फ्यूचर परफॉर्मेंस अच्छी होने वाली है तो इन्वेस्टर उस कंपनी के शेयर के ज्यादा पैसा देने के लिए भी तैयार हैं।

• अगर कंपनी का P/E low है यानी 13 से कम है तो उसके दो कारण होते हैं या तो कंपनी के शेयर अंडर प्राइस है यानी कि शेयर की प्राइस जितनी होनी चाहिए उससे कम है या तो कंपनी की फ्यूचर परफॉर्म्स खराब होने वाली हैं।

• price to earning ratio करके आप कंपनी को कंपेयर कर सकते हैं पर ध्यान रखिएगा कि दोनों कंपनी एक ही सेक्टर की होनी चाहिए।

ROE (Return of Equity)

• ROE एक profit ability ratio है यह हमें बताता है की शेयर होल्डर की इन्वेस्टमेंट यानी इक्विटी फाइनेंसिंग करके कंपनी कितना प्रॉफिट जनरेट कर रही हैं।

• ROE निकालने का फार्मूला है ROE equal to Net income divided by share holder's equity.

•Share holder's equity equal to total assets minus total liabilities.

ROTC (Return on total capital)

• ROTC हमें बताता है कि debt financing और equity financing इस्तेमाल करके कंपनी कितना प्रॉफिट जनरेट कर रही हैं।

• ROTC का फार्मूला है ROTC equal to net income divided by total capital.

• ROTC equal to net income divided by debt equity.

Price to book value

• price to book value सीखने से पहले हम यह जानेंगे कि बुक वैल्यू क्या होता है  तो अगर कोई कंपनी अपने बिजनेस बंद कर रही है तो वह अपने सारे ऐसैट्स बेच देगी अगर आम भाषा में बात करें तो उधार लिए हुए पैसे देने होंगे और उसके बाद जो पैसा बचेगा वह कंपनी के एक्चुअल वैल्यू है जिसे बुक वैल्यू कहा जाता हैं।

• Book value का फॉर्मूला है book value equal to total assets minus total liabilities minus intangibles assets.

• जो चीज हम नाप सकते हैं उसे Tangible Assets कहा जाता है और जो चीज हम नाप नहीं सकते उसे Intangible कहा जाता हैं।

• Price to book value हमें बताता है कि शेयर की प्राइस under value है या over value.

• Price to book value का फार्मूला है price to book value equal to market price per share divided by book value per share.

• Book value per share equal to book value divided by total no.of shares outstanding.

• price to book value ratio एक से ज्यादा है तो शेयर की प्राइस ओवर वैल्यू है या कंपनी का बिजनेस बहुत अच्छा परफॉर्म कर रहा हैं।

• Price to book value एक से कम है तो शेयर की प्राइस अंडर वैल्यू है या कंपनी खराब परफॉर्म कर रही हैं।

Debt To Equity Ratio

• Debt to equity ratio एक financial liquidity ratio है जो हमें बताता है कि कंपनी का कितना परसेंट कैपिटल equity financing से आया है और कितना परसेंट कैपिटल debt financing से आया है।

• Debt to equity ratio का फार्मूला है total liabilities divided by total equity.

• Debt to equity ratio को balance sheet ratio भी कहते हैं क्योंकि  total liabilities,total assets यह सब चीजें बैलेंस शीट से होती हैं।

• अगर किसी कंपनी debt to equity ratio एक से कम है तो वह हमें बताता है कि कंपनी की debt financing equity से कम हैं।

• अगर debt to equity ratio एक से ज्यादा है तो वह debt financing equity से ज्यादा हैं।

• अगर debt to equity ratio बराबर है तो आधा यानी कि 50परसेंट debt से आया है और 50 परसेंट equity से।

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